रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन अग्रणी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानि) ने 12 जून 2026 को हैदराबाद में “विकसित भारत 2047 में सामरिक सामग्रियों की भूमिका” विषय पर ग्राहक सम्मेलन 2026 का आयोजन किया।
इस सम्मेलन में देश के रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु एवं अन्य सामरिक क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों तथा प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में उन्नत सामग्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. जैतीर्थ आर. जोशी, महानिदेशक, ब्रह्मोस (डीआरडीओ) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक, ब्रह्मोस एयरोस्पेस थे, जबकि डॉ. कोमल कपूर, अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी, न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स (एनएफसी) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मिधानि के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एस.वी.एस. नारायण मूर्ति सहित, निदेशक (वित्त) एवं सीएफओ श्रीमती के. मधुबाला, निदेशक (उत्पादन एवं विपणन) श्री पी. बाबू और मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ), मिधानि श्रीमती स्पूर्ति रेड्डी, आईआरएस, आदि वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज की।
अपने मुख्य वक्तव्य में डॉ. नारायण मूर्ति ने रक्षा, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष, परमाणु एवं ऊर्जा क्षेत्रों में सामरिक सामग्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला तथा सुपरएलॉय, टाइटेनियम एलॉय और विशेष इस्पात जैसी उन्नत सामग्रियों के स्वदेशी विकास हेतु मिधानि द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
तकनीकी सत्रों में मिधानि, एचएएल, इसरो, एनएफसी, डीआरडीओ तथा बीएचईएल के विशेषज्ञों ने उभरती तकनीकों, उन्नत सामग्रियों की आवश्यकताओं और सहयोग की संभावनाओं पर प्रस्तुतियाँ दीं।
“विकसित भारत 2047 में सामरिक सामग्रियों की भूमिका” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने, आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ बनाने तथा महत्वपूर्ण सामग्रियों में नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामरिक सामग्रियों में आत्मनिर्भरता भारत के रक्षा, एयरोस्पेस, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, अभियंताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्मेलन ने नवाचार, तकनीकी उत्कृष्टता और आत्मनिर्भरता के माध्यम से “विकसित भारत 2047” के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रति मिधानि की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।
